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Diwali Special : दीपावली पर जानिए क्यों ना मनाएँ ये त्यौहार?

आज हम बात करने वाले हैं दीपावली के त्यौहार की, दोस्तों प्रत्येक वर्ष कार्तिक की अमावस्या को मनाए जाने वाला भारतवर्ष का बड़ा त्योहार है, बड़े ही हर्ष उ०ल्लाह्स से मनाये जाने वाले इस त्योहार से जुड़े कुछ ऐसी बातें आपके सामने रखने वाले हैं जिसे सुनकर आप विश्वास नहीं करेंगे, दोस्तों रावण वध के बाद श्री राम जी के आगमन के दो वर्ष बाद ही अयोध्यावासी दीपावली के त्योहार को मनाना बंद कर चुके थे। लोग पटाखों से अनावश्यक रूप से ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैलाते हैं एवं शास्त्रविरुद्ध साधना करते हैं। अब इस त्योहार ने मात्र आडम्बर का रूप ग्रहण कर लिया है। आइए इस वीडियो में हम जानेंगे इस त्योहार का पौराणिक महत्व व मनाने की सही विधि के बारे में।

दीपावली के त्योहार की पौराणिक कथा

हिन्दू मान्यताओं के अनुसार त्रेतायुग में विष्णु अवतार श्री राम जी और सीता जी को 14 वर्ष का वनवास हुआ था। वनवास के दौरान ही रावण ने सीता जी का हरण किया। उसके बाद राम जी सीता जी को रावण से युद्ध कर लेकर आये। यही समय 14 वर्ष के वनवास के पूरे होने का भी था। अधर्मी रावण से सीता माता को वापस लेकर जब श्रीराम अयोध्या वापस लौटे तो अयोध्यावासियों की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं था। अपने प्रिय राजा रानी के आगमन की शुभ सूचना पाकर अयोध्यावासियों ने दीपक जलाकर उस अमावस्या की अंधकारमयी रात्रि को भी जगमग और उज्वल किया और श्री राम और माता सीता के आगमन की खुशी मनाई। किन्तु दीपावली का यह त्योहार आयोध्यावासियों द्वारा दो बार तक ही मनाया जा सका।

अयोध्यावासियों ने बंद कर दिया था दिवाली का त्योहार

दीपावली का त्योहार प्रतिवर्ष जोर शोर से मनाया जाता है। किंतु क्या आप जानते हैं जैसे ही माता सीता को अयोध्या से निकाल दिया गया था वैसे ही अयोध्यावासियों ने दीवाली का त्योहार मानना बंद कर दिया था। अयोध्या के एक धोबी ने राजा राम द्वारा रावण की बंदी रही सीता माता को साथ रखना अनुचित ठहराया। राम जी को जब इसकी भनक लगी तो उनके द्वारा सीता माता को गर्भावस्था में अयोध्या से निष्कासित किया गया। अयोध्यावासी इस घटना से इतने दुखी हो गए कि उसके पश्चात अयोध्यावासियों ने कभी भी दीवाली का त्योहार नहीं मनाया। किन्तु लोकवेद को सत्य मानकर अंध श्रद्धालुओं ने मनमाने रूप से पुनः इस त्योहार को मनाना शुरू कर दिया जिसका अब न तो कोई महत्व है और न ही कोई अर्थ। सीता माता एवं मर्यादापुरुषोत्तम श्रीराम अलग अलग हो चुके थे तथा अयोध्यावासियों के लिए दिवाली का कोई अर्थ नहीं रह गया था। प्रत्येक वर्ष लोकवेद के अनुसार मनमाने ढंग से ही सुख समृद्धि के लिए दिवाली मनाई जाती है। आइए जानें पूरे रहस्य को आखिर कौन है भगवान और कैसे मिलेगी सुख समृद्धि।

दीपावली का त्योहार कब मनाया जाता है?

दिवाली प्रत्येक वर्ष कार्तिक की अमावस्या को मनाए जाने वाला त्योहार है। दीपावली भारत के सबसे बड़े और सर्वाधिक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। भारतवर्ष में केवल हिन्दू ही नहीं बल्कि सिख और जैन धर्म के लोगों द्वारा भी इस त्योहार को मनाया जाता है। जैन धर्म के लोग इस दिन को महावीर जैन के मोक्ष दिवस के रूप में मनाते हैं। तथा सिख समुदाय इसे बन्दीछोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं। यहाँ उल्लेख करना आवश्यक है कि वेदों में पूर्ण परमात्मा “कविर्देव का नाम लिखा है। उसी को बन्दीछोड़ भी कहा है। उसका नाम कबीर हैं। वह पापनाशक हैं और बन्धनों का शत्रु होने के कारण उसे बन्दीछोड़ कहा गया है। यदि सतगुरु से नाम दीक्षा लेकर दीप प्रज्वलित करके हर दिन यह त्योहार को मनाए तो सर्व पापों से छुटकारा मिल सकता है।

Diwali Special

दीपावली किस तरह मनाई जाती है?

दीपावली के त्योहार को अयोध्यावासी दो वर्ष के बाद ही मनाना त्याग चुके थे। लोग पटाखों से अनावश्यक रूप से ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण फैलाते हैं एवं शास्त्रविरुद्ध साधना करते हैं। अब इस त्योहार ने मात्र आडम्बर का रूप ग्रहण कर लिया है। 

गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 में शास्त्रविरुद्ध साधना करने वालो को कोई लाभ न मिलना व कोई गति न होना बताया गया है। भगवद्गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 के अनुसार शास्त्र विरूद्ध साधना करने से हमें कोई लाभ नहीं प्राप्त होता है। श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 7 के श्लोक 12-15 में प्रमाण है। जो व्यक्ति तीन गुणों की पूजा करता है वो मूर्ख बुद्धि, मनुष्यों में नीच, राक्षस स्वभाव को धारण किये हुए होते हैं। श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 16 के श्लोक 23 में लिखा है कि शास्त्र विरुद्ध साधना करने से न तो लाभ मिलेगा न ही गति होगी।

Diwali मनाने से क्या लाभ है?

दीपावली 2023 या दिवाली शास्त्र विरूद्ध व लोकवेद पर आधारित मनमाना आचरण है, इस कारण इससे श्रद्धालुओं को कोई लाभ नहीं मिलता है। लक्ष्मी जी – गणेश जी की पूजा से कोई लाभ नहीं है क्योंकि यह शास्त्रों में वर्णित साधनाएं नहीं हैं। व्यक्ति अपने कर्मानुसार ही फल पाता है। निर्धन व्यक्ति कितना भी ध्यान से पूजा करे यदि उसके भाग्य में धन नहीं है तो उसे पूर्ण परमेश्वर कबीर के अतिरिक्त विश्व के अन्य कोई देवी देवता उसे धन नहीं दे सकते। भाग्य से अधिक आकांक्षा रखने वाले को पूर्ण परमेश्वर की भक्ति करनी चाहिए।

क्या माता के गर्भ से जन्म लेने वाले ‘श्री राम’ भगवान है?

यह तो हम सभी जानते हैं कि जो जन्म लेता है वो मरता भी है लेकिन अगर बात करें परमात्मा की तो वो तो जन्म – मृत्यु से रहित है। तो क्या परमात्मा का जन्म आम इंसानों की तरह माँ के पेट से होता है? तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज ने बताया है कि परमात्मा की तीन प्रकार की स्थिति है। पहली स्थिति में वो ऊपर सतलोक में विराजमान रहता है, दूसरी स्थिति में वो जिंदा महात्मा के रूप में अपने भगतों को मिलता है और तीसरी स्थिति में वो विशेष बालक के रूप में एक तालाब में कमल के पुष्प पर प्रकट होकर धरती पर रहता है और कुंवारी गाय का दूध पीता है। इसका अर्थ यह हुआ कि श्री राम एक महान पुरुष तो माने जा सकते हैं लेकिन परमात्मा कदाचित नहीं। पूर्ण परमात्मा कोई और नहीं बल्कि कबीर साहेब हैं जो चारो युगों में आते हैं।

सतयुग में सतसुकृत कह टेरा, त्रेता नाम मुनिन्द्र मेरा।

द्वापर में करूणामय कहलाया, कलियुग में नाम कबीर धराया।।

हमें किसकी भक्ति करनी चाहिए?

देवी भागवत महापुराण में ही देवी जी यानि दुर्गा जी अपने से अन्य किसी और भगवान की भक्ति करने के लिए कह रही है। इससे स्पष्ट है कि देवी दुर्गा जी से भी ऊपर अन्य कोई परमात्मा है जिसकी भक्ति करने के लिए दुर्गा जी निर्देश दे रही हैं। इससे स्पष्ट है कि देवी दुर्गा जी की भी भक्ति करना व्यर्थ है। वह पूर्ण परमात्मा तो कोई और है। पूर्ण परमात्मा की पूरी जानकारी तत्वदर्शी संत ही बता सकते हैं जो स्वंय पूर्ण परमात्मा ही होता है। गीता अध्याय 4 के श्लोक 34 में गीता ज्ञानदाता ने तत्वदर्शी संत की खोज करने के लिए कहा है।

पूर्ण संत चारों वेदों, छः शास्त्रों, अठारह पुराणों आदि सभी ग्रंथों का पूर्ण ज्ञाता होता है वह उनका सार जानता है। वर्तमान में इस पूरी धरा पर एकमात्र तत्वदर्शी जगतगुरु रामपाल जी महाराज हैं जो सभी धर्मों के ग्रन्थों से प्रमाणित गूढ़ रहस्यमयी ज्ञान बताते हैं। 

इस दीवाली पर पूर्ण परमात्मा को कैसे प्राप्त करें?

कबीर परमात्मा ही सर्वोच्च, सर्वसुखदायक, आदि परमेश्वर हैं। वे बन्दीछोड़ हैं व पापों के नाशक हैं। पूर्ण परमात्मा को पाने के लिए ऐसे महान सतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज की शरण में आकर उनसे पूर्ण परमात्मा प्राप्ति के बारे में यथार्थ भक्ति विधि के बारे सतज्ञान अर्जित करें। इस संसार में एक पल का भी भरोसा नहीं अतः अतिशीघ्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी से निशुल्क नाम-दीक्षा ले कर भक्ति करें। अधिक जानकारी के लिए सतलोक आश्रम यूट्यूब चैनल पर सत्संग श्रवण करें।

कबीर, मानुष जन्म दुर्लभ है, मिलें न बारं-बार |

तरवर से पत्ता टूट गिरे, बहुर ना लागे डार |

Name: Abhishek Dass | Editor, As Dass YouTube Channal (2017 - present) A dedicated journalist providing trustworthy news, Abhishek believes in ethical journalism and enjoys writing. He is self starter, very focused, creative thinker, and has teamwork skills. Abhishek has a strong knowledge of all social media platforms. He has an intense desire to know the truth behind any matter. He is God-fearing, very spiritual person, pure vegetarian, and a kind hearted soul. He has immense faith in the Almighty. work : https://youtube.com/@AsDass

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