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kalyug me satyug by sant rampal ji maharaj

कलयुग में सतयुग

‘‘कलयुग में सत्ययुग’’ (सन्त रामपाल जी के सत्संग वचनों से उद्धृत) सत्ययुग उस समय को कहते हैं जिस युग में अधर्म नहीं होता। शांति होती है। पिता से पहले पुत्र की मृत्यु नहीं होती, स्त्री  विधवा नहीं होती। रोग रहित शरीर होता हैं। सर्व मानव भक्ति करते हैं। परमात्मा से [...]